आयुर्वेद में पेड़ों से निकलने वाले गोंद को 'प्राकृतिक पावरहाउस' माना गया है। ये न केवल हमारे शरीर को अंदरूनी मजबूती देते हैं, बल्कि कई गंभीर बीमारियों को जड़ से खत्म करने की क्षमता भी रखते हैं।
यहाँ फोटो में दिए गए कुछ प्रमुख गोंद और उनके अनूठे गुणों की जानकारी दी गई है:
1. गोंद कतीरा (Tragacanth Gum)
यह तासीर में ठंडा होता है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर की गर्मी दूर करने और लू से बचाने के लिए रामबाण है। यह कब्ज और कमजोरी दूर करने में बहुत प्रभावी है।
2. गोंद बबूल (Acacia Gum)
जोड़ों के दर्द और घुटनों की ग्रीस खत्म होने की समस्या में यह सबसे ज्यादा फायदेमंद है। यह शारीरिक शक्ति बढ़ाने और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत उत्तम माना जाता है।
3. गोंद मोरिंगा (Moringa Gum)
सहजन के पेड़ से मिलने वाला यह गोंद विटामिन और खनिजों से भरपूर है। यह जोड़ों के दर्द, साइटिका और पाचन तंत्र को ठीक करने में मदद करता है।
4. गोंद नीम (Neem Gum)
यह खून को साफ करने (Blood Purifier) का काम करता है। चर्म रोग (Skin diseases) और इन्फेक्शन को दूर रखने के लिए इसका आयुर्वेद में विशेष महत्व है।
5. गोंद गुग्गुल (Guggul)
वजन घटाने और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए गुग्गुल प्रसिद्ध है। यह शरीर की सूजन और वात दोष को शांत करने में बहुत मदद करता है।
6. गोंद लोबान (Loban)
इसका उपयोग अक्सर मानसिक शांति और तनाव दूर करने के लिए किया जाता है। साथ ही, यह सांस संबंधी समस्याओं में भी राहत देता है।
7. गोंद अर्जुन (Arjun Gum)
दिल की सेहत के लिए अर्जुन की छाल की तरह इसका गोंद भी बहुत गुणकारी है। यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।
गोंद के इस्तेमाल के कुछ महत्वपूर्ण नियम:
सफाई का ध्यान: इस्तेमाल से पहले गोंद को अच्छी तरह साफ कर लें ताकि मिट्टी या कंकड़ निकल जाएं।
इस्तेमाल का तरीका: कतीरा जैसे गोंद को भिगोकर इस्तेमाल किया जाता है, जबकि बबूल जैसे गोंद को घी में भूनकर लड्डू या पाउडर के रूप में लिया जाता है।
मात्रा: हर गोंद की तासीर अलग होती है, इसलिए इसे कम मात्रा (5-10 ग्राम) से शुरू करें।
विशेष नोट: कोई भी आयुर्वेदिक औषधि शुरू करने से पहले अपनी शारीरिक प्रकृति के अनुसार किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
