सेहत का खजाना: घर पर बनाएं 2 किलो देसी घी की शुद्ध पंजीरी
सेहत का खजाना: घर पर बनाएं 2 किलो देसी घी की शुद्ध पंजीरी
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कमजोरी और थकान महसूस होना आम बात है। कई लोग ताकत के लिए तरह-तरह की भस्म और दवाइयां खाते हैं, लेकिन असली ताकत हमारी पारंपरिक देसी खुराक में ही छिपी है।
आज हम आपके साथ साझा कर रहे हैं 2 किलो शुद्ध देसी घी से बनने वाली बेहद ताकतवर पंजीरी की रेसिपी। इस पोस्ट में दी गई सामग्री न केवल आपके शरीर को बल देगी, बल्कि कमर दर्द और दिमागी कमजोरी को भी दूर करेगी।
📝 पंजीरी बनाने की सामग्री (Ingredients List)
अगर आप 2 किलो देसी घी का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको निम्नलिखित मात्रा में सामग्री की आवश्यकता होगी:
मुख्य आधार और मीठा:
शुद्ध देसी घी: 2 किलो
बूरा खांड या शुद्ध देसी खांड: 2 किलो
मेवे (Dry Fruits):
घलेरा बादाम गिरी: 250 ग्राम
काजू टुकड़ा: 250 ग्राम
पिस्ता: 100 ग्राम
दाख स्पेशल (किशमिश): 200 ग्राम
फूल मखाने: 250 ग्राम
बीज और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ:
5 प्रकार के मगज: 200 ग्राम
कोंच बीज: 100 ग्राम
खसखस: 100 ग्राम
काली मिर्च: 50 ग्राम
देसी अजवाइन: 50 ग्राम
गोंद: 250 ग्राम
विशेष आयुर्वेदिक औषधियां:
सतावर: 100 ग्राम
कमरकच: 100 ग्राम
सफेद मूसली: 50 ग्राम
सालम पंजा: 20 ग्राम
सालम मिश्री: 20 ग्राम
पंजीरी बनाना एक कला है। अगर इसे सही तरीके से और सही क्रम (sequence) में बनाया जाए, तो इसका स्वाद और गुण दोनों बढ़ जाते हैं। यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप विधि दी गई है:
👨🍳 पंजीरी बनाने की संपूर्ण विधि (Step-by-Step)
1. मेवों और गोंद की तैयारी
सबसे पहले एक भारी तले वाली कड़ाही में थोड़ा देसी घी गरम करें।
इसमें गोंद को डालें और धीमी आंच पर भूनें। जब गोंद फूलकर कुरकुरा हो जाए, तो इसे बाहर निकालकर ठंडा होने दें और फिर इसे दरदरा कूट लें।
इसके बाद मखाने, बादाम, काजू और पिस्ता को भी हल्का सुनहरा होने तक भून लें और ठंडा होने पर मोटा-मोटा पीस लें (ज्यादा बारीक पाउडर न बनाएं)।
2. जड़ी-बूटियों का मिश्रण
सालम पंजा, सालम मिश्री, सफेद मूसली, सतावर, कोंच बीज और कमरकच जैसी जड़ी-बूटियों को साफ करके बारीक पीस लें।
खसखस, मगज और काली मिर्च को भी हल्का सा दरदरा कर लें।
3. मुख्य भुनाई (The Roasting)
कड़ाही में बाकी बचा हुआ 2 किलो देसी घी डालें।
अगर आप इसमें आटा डालना चाहते हैं (जैसा कि आमतौर पर किया जाता है), तो घी में आटा डालकर धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक वह बादामी रंग का न हो जाए और खुशबू न आने लगे।
जब आटा भून जाए, तो आंच बिल्कुल धीमी कर दें और इसमें अजवाइन, खसखस और सभी पिसी हुई जड़ी-बूटियां डाल दें। इन्हें 2-3 मिनट तक चलाएं ताकि जड़ी-बूटियां घी में अच्छी तरह रच-बस जाएं।
4. अंतिम मिश्रण
अब कड़ाही को आंच से नीचे उतार लें।
इसमें पहले से तैयार किए गए भुने हुए ड्राई फ्रूट्स, मखाने और कुटा हुआ गोंद डाल दें।
अंत में, इसमें 2 किलो बूरा खांड या देसी खांड मिलाएं। ध्यान रखें कि मीठा हमेशा मिश्रण के हल्का ठंडा होने पर ही मिलाएं, वरना चीनी पानी छोड़ सकती है।
5. स्टोर करना
पंजीरी को पूरी तरह ठंडा होने दें।
ठंडा होने के बाद इसे कांच के या स्टील के एयर-टाइट डिब्बे में भरकर रखें।
💡 जरूरी टिप्स (Important Tips):
आंच का ध्यान: पूरी प्रक्रिया के दौरान आंच को धीमा या मध्यम रखें। तेज आंच पर जड़ी-बूटियों के पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं।
सेवन विधि: रोजाना सुबह या रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध के साथ 2-3 चम्मच पंजीरी का सेवन सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।
✨ इस पंजीरी के फायदे
हड्डियों की मजबूती: गोंद और सफेद मूसली जोड़ों और कमर के दर्द में चमत्कारी लाभ देते हैं।
दिमागी ताकत: बादाम और मगज याददाश्त बढ़ाते हैं और एकाग्रता में सुधार करते हैं।
शारीरिक ऊर्जा: इसमें डाली गई जड़ी-बूटियां पुराने से पुराने शारीरिक दर्द और कमजोरी को दूर करती हैं।
नेचुरल सप्लीमेंट: यह किसी भी बाहरी भस्म या पाउडर से हजार गुना बेहतर और सुरक्षित है।
सावधानी: गर्भवती महिलाएं या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग इसे लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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