विटामिन B12: शरीर का 'साइलेंट हीरो' जो आपको ऊर्जा और मानसिक शक्ति देता है

 

Vitamin B12 benefits and food sources guide in Hindi

अक्सर जब हम सेहत की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान प्रोटीन, कैल्शियम या विटामिन C पर ही जाता है। लेकिन एक ऐसा विटामिन है जो पर्दे के पीछे रहकर हमारे दिमाग से लेकर हमारे खून तक की हिफाजत करता है—वह है विटामिन B12 (कोबालमिन)। इसे शरीर का 'Silent Hero' कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि इसकी कमी होने पर पूरा शरीर जवाब देने लगता है।

​1. विटामिन B12 हमारे लिए क्यों जरूरी है?

​विटामिन B12 एक ऐसा पोषक तत्व है जिसे हमारा शरीर खुद नहीं बना सकता, लेकिन इसके बिना हमारा सिस्टम सही से चल भी नहीं सकता। इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:

​लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण: यह शरीर में स्वस्थ Red Blood Cells (RBC) बनाने में मदद करता है। इसकी कमी से एनीमिया (खून की कमी) हो सकता है।

​तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की सुरक्षा: हमारी नसों के ऊपर एक सुरक्षा कवच होता है जिसे 'माइलिन' कहते हैं। B12 इस कवच को बनाए रखता है ताकि दिमाग के सिग्नल पूरे शरीर में सही से पहुँचें।

​DNA का निर्माण: हमारी कोशिकाओं के अंदर जो जेनेटिक मटेरियल यानी DNA होता है, उसके बनने और मरम्मत (Repair) में B12 का बड़ा हाथ है।

​मानसिक स्वास्थ्य: यह दिमाग में 'सेरोटोनिन' नामक केमिकल बनाने में मदद करता है, जो हमारे मूड को खुशहाल रखता है और तनाव कम करता है।

​2. विटामिन B12 की कमी के लक्षण (Symptoms)

​विटामिन B12 की कमी रातों-रात नहीं होती, इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं:

​लगातार थकान: भरपूर नींद लेने के बाद भी अगर आप सुबह उठकर थका हुआ महसूस करते हैं, तो यह B12 की कमी हो सकती है।

​हाथ-पैरों में झुनझुनी: ऐसा महसूस होना जैसे सुइयां चुभ रही हों या अचानक हाथ-पैर सुन्न (Numb) हो जाना।

​याददाश्त में कमी: बातों को भूलना, ध्यान केंद्रित न कर पाना या 'ब्रेन फॉग' जैसा महसूस होना।

​जीभ में सूजन या छाले: जीभ का लाल हो जाना, उसमें सूजन आना या मुँह में बार-बार छाले होना।

​चिड़चिड़ापन: बिना किसी बड़े कारण के मूड खराब रहना या उदासी महसूस होना।

​3. विटामिन B12 के प्रमुख स्रोत (Sources)

​विटामिन B12 मुख्य रूप से पशु उत्पादों में पाया जाता है, लेकिन शाकाहारी लोग भी कुछ खास चीजों से इसे प्राप्त कर सकते हैं:

​शाकाहारी स्रोत (Vegetarian Sources):

​दूध और दही: रोजाना एक गिलास दूध और एक कटोरी ताजा दही B12 का बेहतरीन जरिया है।

​पनीर: डेयरी उत्पादों में B12 प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है।

​फोर्टिफाइड फूड्स: आजकल बाजार में ऐसे अनाज (Cereals) और ओट्स आते हैं जिनमें अलग से विटामिन B12 मिलाया जाता है।

​मशरूम: कुछ खास प्रकार के मशरूम में भी इसकी थोड़ी मात्रा पाई जाती है।

​मांसाहारी स्रोत (Non-Veg Sources):

​अंडे: अंडे की जर्दी (पीला भाग) में अच्छी मात्रा में B12 होता है।

​मछली: साल्मन और टूना जैसी मछलियाँ इस विटामिन का पावरहाउस हैं।

​चिकन और मीट: इनमें भी भरपूर मात्रा में B12 पाया जाता है।

​4. अवशोषण (Absorption) की समस्या

​कई बार हम अच्छी डाइट लेते हैं, फिर भी शरीर में B12 की कमी निकलती है। इसका कारण हमारा पाचन तंत्र (Gut Health) हो सकता है। हमारे पेट में एक 'इंट्रिंसिक फैक्टर' नामक प्रोटीन होता है जो B12 को सोखने में मदद करता है। अगर आपको एसिडिटी की पुरानी बीमारी है या आप पेट साफ करने वाली दवाइयाँ ज्यादा लेते हैं, तो आपका शरीर भोजन से B12 नहीं निकाल पाता।

​5. सावधानी और सलाह

​अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो एक साधारण ब्लड टेस्ट (Serum Vitamin B12 Test) जरूर करवाएं। यदि लेवल 200 pg/mL से कम है, तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट या इंजेक्शन लेना जरूरी हो सकता है।

​निष्कर्ष:

40 की उम्र के बाद और शाकाहारी जीवनशैली अपनाने वाले लोगों को अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। याद रखें, विटामिन B12 सिर्फ एक पोषक तत्व नहीं है, बल्कि यह आपकी सक्रिय जीवनशैली और मानसिक शांति की चाबी है।

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